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पढो और नौकर बनो!


नमस्कार दोस्तों,

आज में फिर अपने ब्लॉग के माध्यम से आपके सामने एक गहन विचार का विषय लाया हूं|

हमारे देश के हजारो लाखो युवा IIT, IIM जैसे इंस्टिट्यूट से पढ कर भी देश मे या विदेश में नौकरी करने का सोचते हैं और गूगल,माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक जैसी बड़ी कम्पनी में एक बड़ी सैलरी पर काम करना चाहते हैं| तो आज का मेरे ब्लॉग का टॉपिक यही हैं की  "पढो और नौकर बनो|"

“क्या सच में पढ़ लिखने के बाद सिर्फ नौकरी करना ही एक मात्र विकल्प हैं?”

शायद इसका मूल कारण हमारे शिक्षा प्रणाली और हमारे समाज की जड़ो में ही छिपा हैं |

हमारी शिक्षा प्रणाली और हमारा समाज बच्चपन से ही हमें इस प्रकार प्रशिक्षित करता हैं की हम एक नौकर बने|

इसे हम एक उदाहरण से समझते हैं :- जब एक 10 वी कक्षा के छात्र से स्कूल में पूछा जाता हैं की आप बड़ा होकर क्या बनोगे तो वो जवाब देता हैं , “मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहता हूँ |” या फिर ये जवाब हो सकता हैं की “मैं बड़ा होकर इंजिनियर बनना चाहता हूँ| या टीचर या फिर आईएएस (कलेक्टर)”, पर क्या सच में पढ़ लिखने के बाद नौकरी ही एक मात्र विकल्प हैं ?

क्यों कोई बच्चा ये नहीं कहता की मैं बड़ा होकर अपना खुद का बिज़नेस करना चाहता हूँ|

मतलब साफ हैं की बच्चो को बच्चपन से ही नौकर बनने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता हैं |

स्कूल में बच्चो को गाय, मेरे विद्यालय, और तो और अपने दोस्त पर तक निबंध लिखना सिखाया जाता हैं पर जिसे सबसे ज्यादा समझने की जरुरत हैं उसी पर कभी दो लाइन भी नहीं लिखवाई जाती और वो हैं “आप” |

“बच्चों को कभी किसी स्कूल में खुद पर निबंध कैसे लिखे ये कभी नहीं बताया जाता”

बच्चा क्या चाहता हैं? उसकी क्या क्वालिटी हैं? कभी नहीं बताया जाता| बच्चपन से उसे सिखाया जाता हैं या फिर ये कह सकते हैं की डराया जाता हैं की अच्छे से पढो नही तो नौकरी नहीं मिलेगी | बच्चपन से ही उसे सिर्फ एक ही चीज़ बताई जाती है वो है नौकरी और सिर्फ नौकरी |बड़े होकर डॉक्टर बनो या इंजिनियर बनो| या सरकारी नौकरी करो |  

कभी ये नहीं समझया जाता की अपने खुद के बिज़नेस के मालिक बनो और नौकरिया दो| हमें स्कूल में अपनी कमजोरी पर ध्यान देना सिखाया जाता हैं और कहा जाता हैं की अपनी कमजोरी पर काम करो और उसे अपनी मजबूती बनाओ| असल में अपनी ताकत पर ध्यान देना सिखाया जाना चाहिए ना की कमजोरी पर |

एक उदाहरण से समझते है भारती क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली बल्लेबाजी बहुत अच्छी करते हैं ये उनकी ताकत हैं लेकिन गेंदबाजी उनकी कमजोरी हैं | लेकिन वो एक चीज़ जानते हैं की अपने-अपने विभाग के विशेषज्ञ  से काम कैसे करवाया जाता हैं? वो एक लीडर की योग्यता रखते हैं जिसे स्कूल में नहीं सिखाया जाता | स्कूल हमें विशेषज्ञ बनाते हैं पर ये नहीं सिखाते की हम हमसे ज्यादा विशेषज्ञों के समूह से अपने लिए काम कैसे करवाए?


फोर्ड कार कम्पनी के मालिक हेनरी फोर्ड जो की ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन उन्होंने फोर्ड कार कंपनी की स्थापना की|

हेनरी फोर्ड ने विशेषज्ञ इंजिनियरो के समूह की सहायता से फोर्ड कार बनाई और एक सफल बिज़नेसमेन बने | जबकि वो खुद ना तो ज्यादा पढ़े लिखे थे ना ही कोई विशेषज्ञ| पर वो एक बात जानते थे की विशेषज्ञों के समूह से अपने लिए काम कैसे करवाए जाये ?  

सारांश : हमारी शिक्षा प्रणाली हमें दुसरो के लिए काम करना है तो सिखाती है पर दुसरो से अपना काम कैसे करवाना हैं ये नहीं सिखाती?

अगर ब्लॉग पसंद आता है तो कमेंट्स बॉक्स में कमेंट्स करे और ज्यादा से ज्यादा share करे | धन्यवाद |

Comments

  1. बहुत ही सही तथ्यों के साथ पेश किया.. विचारणीय विषय.. 👌👌👏👏

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  2. Ji bhai apne ye tk sahi kaha ki hme humari shiksha pranaali bdlni chahiye very good topic

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